उत्तराखण्ड

हैट्रिक क्वीन से आगे बढ़ेंगी रेखा आर्य या एंटी इनकंबेंसी की बॉल पर होंगी क्लीन बोल्ड, क्या कहता है सियासी गणित?

खबर शेयर करें -

rekha arya

उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले का सोमेश्वर विधानसभा क्षेत्र राज्य की सबसे हाई-प्रोफाइल अनुसूचित जाति आरक्षित सीटों में से एक है। अल्मोड़ा संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली यह सीट केवल एक चुनावी क्षेत्र नहीं, बल्कि उत्तराखंड की  राजनीति में प्रदीप टम्टा व अजय टम्टा जैसे कद्दावर दलित चेहरों को गढ़ने वाली एक मजबूत प्रयोगशाला रही है। केंद्रीय राजनीति से लेकर राज्य सरकार के मंत्रिमंडल तक अपनी धमक जमाने वाले कई बड़े नेताओं के सियासी सफर की शुरुआत इसी सोमेश्वर घाटी से हुई है। 

सोमेश्वर का चुनावी इतिहास है बेहद दिलचस्प

सोमेश्वर विधानसभा का चुनावी इतिहास बेहद दिलचस्प और नाटकीय मोड़ों से भरा रहा है। यहां के मतदाताओं ने हमेशा मजबूत जनाधार वाले नेताओं को तरजीह दी है। अलग उत्तराखंड राज्य के गठन के बाद हुए पहले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के कद्दावर नेता प्रदीप टम्टा ने यहां से ऐतिहासिक जीत दर्ज की। उन्होंने भाजपा के प्रत्याशी राजेश कुमार को शिकस्त देकर सोमेश्वर का पहला विधायक बनने का गौरव हासिल किया। मगर 2007 के विस चुनाव में भाजपा ने जोरदार वापसी की।

भाजपा उम्मीदवार अजय टम्टा मौजूदी केंद्रीय राज्य मंत्री व सांसद ने कांग्रेस के प्रदीप टम्टा को कड़े मुकाबले में हराकर जीत दर्ज की और अपनी मजबूत  राजनीतिक पकड़ की नींव रखी। 2012 में भी अजय टम्टा ने अपनी लोकप्रियता बरकरार रखते हुए लगातार दूसरी बार भाजपा को जीत दिलाई। मगर इस चुनाव की सबसे बड़ी चर्चा रेखा आर्या रहीं। भाजपा से टिकट न मिलने पर उन्होंने बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़ा और 33.48% वोट हासिल कर दूसरा स्थान पाया, जबकि कांग्रेस के राजेंद्र बाराकोटी तीसरे स्थान पर खिसक गए। 

2014 के लोकसभा चुनाव में अजय टम्टा के अल्मोड़ा से सांसद निर्वाचित होने के बाद यह सीट खाली हो गई। उपचुनाव में रेखा आर्या ने कांग्रेस का दामन थामा और शानदार जीत हासिल कर पहली बार विधानसभा पहुंचीं। लेकिन 2016 में हुई कांग्रेस की बगावत के दौरान रेखा आर्या भाजपा में शामिल हो गईं। 2017 के चुनाव में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए उन्होंने कांग्रेस के राजेंद्र बाराकोटी को बेहद रोमांचक मुकाबले में मात्र 710 वोटों के अंतर से हराया।

सोमेश्वर क्षेत्र में SIR में कटे 7,492 वोट

भाजपा के सिंबल पर रेखा आर्या ने सोमेश्वर से अपनी हैट्रिक लगाई। यह भाजपा उम्मीदवार के रूप में उनकी लगातार दूसरी जीत थी। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के राजेंद्र बाराकोटी को और ज्यादा यानी 5,293 वोटों के स्पष्ट अंतर से पराजित कर अपनी राजनीतिक बादशाहत साबित की। लेकिन प्रदेश में जारी वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में इस विधानसभा क्षेत्र में 7,492 वोट कट गए हैं, जो कि पिछले हार-जीत के अंतर से काफी ज्यादा है। इन हालात में 2027 के चुनाव में क्या गुल खिलेगा कहा नहीं जा सकता।    

राजनीति

चुनावी वैतरणी पार करने के लिए गैर-आरक्षित वर्ग का समर्थन बेहद जरूरी

सोमेश्वर सीट भले ही अनुसूचित जाति प्रत्याशी के लिए आरक्षित हो, लेकिन यहां की चुनावी वैतरणी पार करने के लिए गैर-आरक्षित वर्ग (राजपूत और ब्राह्मण) का समर्थन बेहद जरूरी है। यहां का जातिगत ढांचा चुनावी गणित को बेहद पेचीदा और दिलचस्प बनाता है।

अनुमानों के मुताबिक इस सीट पर 31 से 33 फीसद अनुसूचित जाति की आबादी है। प्रत्याशियों का मूल आधार और जनाधार इसी वर्ग से तय होता है। इस सीट में 35 से 38 फीसद ठाकुर वोट हैं जो कि सवर्णों का सबसे बड़ा ब्लॉक। ठाकुर बहुल गांवों का एकमुश्त रुझान जीत-हार तय करता है। इस सीट पर 28 से 30 फीसद ब्राह्मण वोट सांस्कृतिक व राजनीतिक रूप से बेहद प्रभावशाली है। चुनावी हवा का रुख मोड़ने में इनकी अहम भूमिका होती है। यहां दो से चार फीसद ओबीसी भी है जो कि सोमेश्वर, ताकुला और आसपास के मुख्य बाजार क्षेत्रों तक सीमित हैं। इन जातीय व सामाजिक समीकरणों में दो बड़े वर्गों का मेल किसी भी प्रत्याशी की हार जीत का फैसला कर देता है। 

सोमेश्वर घाटी के मुख्य स्थानीय मुद्दे

सोमेश्वर घाटी को बोरारौ घाटी भी कहा जाता है। यब केवल अपनी राजनीतिक सरगर्मी ही नहीं, बल्कि उपजाऊ कोसी और साईं नदी की घाटियों के लिए भी जाना जाता है। हालांकि, यहां के स्थानीय मुद्दे स्वास्थ्य व शिक्षा, कृषि, सिंचाई और जंगली जानवरों का आतंक और सड़क कनेक्टिविटी एवं पलायन आज भी चुनावी हवा का रुख तय करते हैं।

सोमेश्वर घाटी स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) और दूरस्थ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) में विशेषज्ञ डॉक्टरों व आधुनिक उपकरणों की स्थायी नियुक्ति यहाँ की सबसे पुरानी मांग है। कोसी और साईं नदी के कछार में खेती मुख्य आजीविका है। सिंचाई नहरों की बदहाली और बंदरों व सुअरों द्वारा फसलों का भारी नुकसान यहाँ के किसानों के लिए सबसे बड़ा संकट है। उच्च पर्वतीय और दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में बदहाल सड़कें और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों का अभाव यहाँ के युवाओं को पलायन के लिए मजबूर कर रहा है।

दिग्गजों का दबदबा और नए चेहरों की सुगबुगाहट

सोमेश्वर में दोनों मुख्य राष्ट्रीय दलों भाजपा और कांग्रेस में में भीतर ही भीतर सियासी घमासान और टिकट की दावेदारी को लेकर हलचल बनी रहती है। ऐसे में दिग्गजों के दबदबे के बीच नए चेहरों की सुगबुगाहट बनी रहती है। भाजपा की बात करें तो लगातार तीन बार की विधायक और पुष्कर सिंह धामी सरकार में कैबिनेट मंत्री होने के नाते रेखा आर्या सीट पर सबसे मजबूत और स्वाभाविक दावेदार हैं। अजय़ टम्टा के लोकसभा क्षेत्र में यह विधानसभा क्षेत्र आता है ऐसे में हो सकता है कि 2027 में उनकी पसंद का भी कोई चेहरा टिकट पर दावा ठोके। लेकिन कोश्यारी गुट की करीबी होने व मजबूत सांगठनिक पकड़ के कारण रेखा आर्या का पलड़ा भारी लगता है। हालांकि लंबे समय तक सत्ता में रहने के कारण स्थानीय स्तर पर एंटी-इंकंबेंसी से निपटने के लिए भाजपा एससी मोर्चा और मंडल स्तर के कुछ पदाधिकारी अंदरखाने नए चेहरे की मांग उठाते हैं, लेकिन मंत्री के बड़े  राजनीतिक कद के आगे यह दावेदारी फिलहाल कमजोर दिखती है। 

राजनीति

कांग्रेस की बात करें तो लगातार तीन चुनावों यानी 2012, 2017, 2022  में कांग्रेस के सिंबल पर चुनाव लड़ चुके बाराकोटी का जमीनी कार्यकर्ताओं में अच्छा प्रभाव है। 2017 में 710 वोटों से हारने के कारण वे अब भी मजबूत दावेदार माने जाते हैं। लेकिन पूर्व सांसद और सोमेश्वर के पहले विधायक प्रदीप टम्टा का यहाँ अपना वफादार कैडर वोट बैंक है। यदि पार्टी चेहरा बदलने की रणनीति बनाती है, तो टम्टा समर्थित कोई नया युवा दलित चेहरा दौड़ में आगे आ सकता है। पार्टी के जिला पंचायत सदस्यों और एससी प्रकोष्ठ के स्थानीय नेताओं की भी अपनी दावेदारी बनी रहती है।

इसी के साथ पीसी तिवारी की उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी का सोमेश्वर-अल्मोड़ा क्षेत्र में हमेशा से एक वैचारिक जनाधार रहा है। वे लगातार जल-जंगल-जमीन और पर्वतीय जनमुद्दों को लेकर मुखर रहते हैं। इसके अलावा, स्थानीय जनमुद्दों पर संघर्ष करने वाले निर्दलीय व सामाजिक कार्यकर्ता भी चुनाव में अपनी उपस्थिति से मुख्य दलों का गणित बिगाड़ते रहे हैं। ऐसे में 2027 का सवाल यह है कि कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या हैट्रिक क्वीन से आगे बढ़ेंगी या एंटी इनकंबेंसी की बॉल पर क्लीन बोल्ड हो जाएंगी।

ADVERTISEMENTS Ad
News100Live Desk
टीम न्यूज़ 100 लाइव