उत्तराखण्ड

हल्द्वानी – हाई कोर्ट शिफ्टिंग की जमीन तलाश बनी टेढ़ी खीर, अब तीन नए ठिकानों पर नजर, जमीनों के दाम छू रहे आसमान!

खबर शेयर करें -

हल्द्वानी – नैनीताल हाई कोर्ट को हल्द्वानी शिफ्ट करने की योजना अब सिर्फ जमीन तलाशने तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसने आसपास के प्रॉपर्टी बाजार में भी हलचल बढ़ा दी है। हाई कोर्ट के लिए नई जमीन की तलाश जारी है और दूसरी ओर संभावित स्थलों के आसपास जमीनों की कीमतों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। स्थानीय स्तर पर जमीनों के दाम बढ़ने की बातें सामने आ रही हैं। ऐसे में हाई कोर्ट शिफ्टिंग की उम्मीद में जमीन खरीदने वाले लोगों के सामने महंगी कीमत पर सौदा करने का जोखिम भी खड़ा हो गया है।

दरअसल, बेलबाबा क्षेत्र में प्रस्तावित करीब 30 हेक्टेयर वन भूमि को केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की क्षेत्रीय सशक्त समिति (आरईसी) से मंजूरी नहीं मिली। समिति ने गैर-वन भूमि पर विकल्प तलाशने का सुझाव दिया। इसके बाद प्रशासन ने नए स्थानों की तलाश शुरू कर दी है। इसी क्रम में बुधवार को अधिकारियों ने गौलापार के मदनपुर और बेरीपड़ाव क्षेत्र में जमीन का निरीक्षण किया। इसके अलावा गौलापार में एक अन्य स्थान भी देखा गया। सूत्रों के मुताबिक, इन तीनों स्थानों पर गैर-वन भूमि की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।

हाई कोर्ट की आहट से प्रॉपर्टी बाजार में हलचल –
हाई कोर्ट शिफ्टिंग के लिए जमीन की तलाश शुरू होने के बाद संभावित क्षेत्रों में प्रॉपर्टी बाजार को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जमीन मालिकों और प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े लोगों की नजर प्रशासन की गतिविधियों पर टिकी है। वहीं, खरीदारों के बीच भी यह चर्चा है कि अगर हाई कोर्ट किसी क्षेत्र में स्थापित होता है तो आने वाले समय में वहां आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

इसी उम्मीद में कुछ लोग जमीन खरीदने की संभावनाएं तलाश रहे हैं। हालांकि, जमीनों की कीमतों में कितनी वास्तविक बढ़ोतरी हुई है, इसका आधिकारिक आंकड़ा फिलहाल सामने नहीं आया है। ऐसे में बाजार में चल रहे दाम और वास्तविक रजिस्ट्री मूल्य के बीच अंतर को समझना भी जरूरी है।

बेलबाबा में वन भूमि बनी थी अड़चन –
इससे पहले बेलबाबा मंदिर के सामने तराई केंद्रीय वन प्रभाग की भाखड़ा रेंज में करीब 30 हेक्टेयर वन भूमि हाई कोर्ट के लिए प्रस्तावित थी। वन विभाग की गणना के अनुसार, निर्माण के लिए सागौन, पीपल समेत विभिन्न प्रजातियों के कुल 123 पेड़ों के कटान का प्रस्ताव था। इसके बदले 60 हेक्टेयर में क्षतिपूरक वनीकरण की योजना बनाई गई थी। लेकिन वन संबंधी अड़चनों के चलते यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका

ADVERTISEMENTS Ad
News100Live Desk
टीम न्यूज़ 100 लाइव