उत्तराखण्ड

Ankita bhandari case: दुष्यंत गौतम के वकील को मिला बड़ा पद, उठे बड़े सवाल

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Ankita bhandari case: अंकिता भंडारी के न्याय की लड़ाई अब एक नए मोड़ पर आ गई है। ‘मूल निवास भू-कानून संघर्ष समिति’ के संस्थापक संयोजक मोहित डिमरी ने भाजपा सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। डिमरी ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में उत्तराखंड सरकार द्वारा की गई एक महत्वपूर्ण नियुक्ति को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को कटघरे में खड़ा किया है।

क्या है पूरा विवाद?

मामला भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया को उत्तराखंड सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में ‘वरिष्ठ अतिरिक्त महाधिवक्ता’ (Senior Additional Advocate General) नियुक्त किए जाने से जुड़ा है। मोहित डिमरी का आरोप है कि यह नियुक्ति अंकिता भंडारी केस में कथित ‘वीआईपी’ का नाम बचाने की कोशिशों का एक हिस्सा हो सकती है। डिमरी ने इस नियुक्ति को लेकर सवाल किया है कि क्या भाजपा सरकार को सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखने के लिए उत्तराखंड का कोई काबिल और वरिष्ठ वकील नहीं मिला? डिमरी ने कहा राज्य के प्रतिभाशाली वकीलों को दरकिनार कर बाहरी व्यक्ति को यह जिम्मेदारी देना राज्य का अपमान है?

दुष्यंत गौतम के निजी वकील हैं गौरव भाटिया

अंकिता भंडारी केस में दुष्यंत गौतम का नाम ऑडियो वायरल होने के बाद सामने आया था, गौरव भाटिया उन्हीं के निजी वकील के तौर पर दिल्ली हाई कोर्ट में पेश हुए थे। डिमरी ने कहा क्या दो महीने बाद उन्हें सरकारी पद दिया जाना, उसी ‘पैरवी’ का इनाम है? मोहित ने सवाल किया कि सीएम धामी ‘देवभूमि’ की बेटियों की सुरक्षा की बात करते हैं, लेकिन जब संदिग्धों के वकील को सरकारी पद से नवाजते हैं, तो जनता के बीच क्या संदेश जाता है? क्या सरकार की प्राथमिकता अंकिता को न्याय दिलाना है या रसूखदारों को बचाना?

मोहित डिमरी ने कहा गौरव भाटिया टीवी डिबेट्स में जिस तरह की आक्रामक और विवादित भाषा का प्रयोग करते हैं, क्या वह ‘अतिरिक्त महाधिवक्ता’ जैसे संवैधानिक और जिम्मेदार पद के लिए उचित है? उन्होंने आगे कहा कि यह सिर्फ अंकिता भंडारी का मामला नहीं है, यह उत्तराखंड की हर बेटी के सम्मान का सवाल है। सरकार जवाब दे कि क्या हत्यारों के संरक्षकों को सजा मिलेगी या उन्हें सरकारी संरक्षण मिलता रहेगा?

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News100Live Desk
टीम न्यूज़ 100 लाइव