उत्तराखण्ड

कर्ज वापस मांगना खुदकुशी के लिए उकसाना नहीं, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला – फोटो : ANI

Supreme Court On Loan Repayment: देश के शीर्ष अदालत ने साफ कर दिया है कि किसी कर्ज लेने वाले से अपने पैसे वापस मांगना अपराध की श्रेणी में नहीं आता। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के एक मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि कर्ज की वसूली के लिए दबाव बनाना या बार-बार फोन करना ‘आत्महत्या के लिए उकसाने’का आधार नहीं हो सकता।

क्या है पूरा मामला?
यह मामला गुजरात के मोरबी जिले का है, जहां एक व्यक्ति ने ट्रैक्टर-ट्रॉली के नीचे कूदकर अपनी जान दे दी थी। मरने से पहले उसने एक सुसाइड नोट छोड़ा था, जिसमें उसने नौ लेनदारों के नाम लिखे थे। उसका आरोप था कि ये लोग बकाया पैसे के लिए उसे परेशान और धमका रहे हैं। इसी सुसाइड नोट के आधार पर धीरभाई नांजीभाई पटेल लोटवाला और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। गुजरात हाई कोर्ट ने इस मामले में एफआईआर रद्द करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाई कोर्ट के आदेश को पलटा
जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने गुजरात हाई कोर्ट के आदेश को पलटते हुए कहा कि केवल सुसाइड नोट में नाम होने से कोई दोषी नहीं हो जाता। अदालत ने कहा कि इसमें किसी भी आरोपी की विशिष्ट भूमिका का जिक्र नहीं था। मृतक ने सभी नौ लेनदारों को ‘एक ही चश्मे’ से देखा और उन पर सामान्य आरोप लगाए

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News100Live Desk
टीम न्यूज़ 100 लाइव