
कर्नाटक के बल्लारी शहर में मतदाता सूची से 7,500 से अधिक लोगों के नाम कटवाने की नाकाम कोशिश के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता और बूथ-लेवल एजेंट (बीएलए) टी. श्रीनिवास मोथकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। 1 अक्टूबर को बल्लारी के ब्रूसपेट पुलिस स्टेशन में दर्ज इस एफआईआर में उन पर ‘सार्वजनिक उपद्रव/भ्रम फैलाने’ के आरोप में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 353 के तहत मामला दर्ज किया गया है। कर्नाटक में फॉर्म-7 के दुरुपयोग को लेकर दर्ज हुई यह छठी एफआईआर है।
कर्नाटक में 7,500 से अधिक वोटरों के नाम हटाने की कोशिश
बल्लारी सिटी नगर निगम के विपक्ष के नेता और भाजपा बीएलए-1 टी. श्रीनिवास मोथकुर ने बल्लारी सिटी विधानसभा क्षेत्र की प्रारूप मतदाता सूची में शामिल 7,561 मतदाताओं के नाम यह दावा करते हुए हटाने की मांग की थी कि वे या तो “अनुपस्थित हैं या स्थानांतरित हो चुके हैं।” जब बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) और निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) ने पर्याप्त सबूत न होने के कारण उनके आवेदनों को खारिज कर दिया, तब उन्होंने सीधे सूची की समीक्षा की मांग की। जांच अधिकारियों के अनुसार, मोथकुर यह साबित करने में विफल रहे कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से इन सभी मतदाताओं का सत्यापन किया था। इसके बाद कांग्रेस बीएलए गौतम एस. की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया। आरोप है कि जिन मतदाताओं को निशाना बनाया गया, उनमें से अधिकांश एक विशिष्ट अल्पसंख्यक समुदाय से ताल्लुक रखते थे।
चुनाव आयोग के नियम और प्रणाली की बड़ी खामी
निर्वाचन आयोग (ECI) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त बीएलए एक दिन में अधिकतम 10 और पूरे पुनरीक्षण अभियान के दौरान कुल मिलाकर 30 से अधिक फॉर्म-7 (विशेष परिस्थितियों में सीमा 50) जमा नहीं कर सकते। यदि कोई बीएलए 30 से अधिक आवेदन दाखिल करता है, तो ERO या AERO के लिए उनका व्यक्तिगत रूप से भौतिक सत्यापन करना अनिवार्य होता है। हालांकि, इस पूरी व्यवस्था में सबसे बड़ी खामी यह सामने आई है कि एक व्यक्तिगत नागरिक या सामान्य मतदाता द्वारा जमा किए जाने वाले फॉर्म-7 की कोई अधिकतम कानूनी सीमा तय नहीं है। नियमों और व्यवस्था के इन छेदों का फायदा उठाकर विभिन्न राज्यों में थोक आपत्तियां दर्ज कराने का खेल खेला जा रहा है।
उत्तराखंड में खटीमा से लेकर झबरेड़ा तक थोक फॉर्म-7 का खेल
उत्तराखंड में विपक्ष का सीधा आरोप है कि यह वैध मतदाताओं के संवैधानिक अधिकार छीनने की साजिश थी और इसमें जाली दस्तावेजों व हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किया गया। झबरेड़ा में भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा खुद के नाम का दुरुपयोग होने की बात स्वीकारने और हलफनामा देने से यह स्पष्ट होता है कि यहां कागजी धोखाधड़ी हुई है। उत्तराखंड के एसआईआर (SIR) अभियान के दौरान भी इसी पैटर्न पर बड़े पैमाने पर आपत्तियां दर्ज की गईं, जिसने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया था।
ऊधमसिंह नगर के खटीमा विधानसभा क्षेत्र में कुल 394 आपत्तियां दर्ज की गई थीं, जिनमें से अकेली 392 आपत्तियां भाजपा के जिला उपाध्यक्ष एवं बीएलए अमित कुमार पांडे ने दाखिल की थी। इनमें अधिकांश मतदाताओं को “अन्यत्र स्थानांतरित” बताकर उनके नाम काटने की मांग की गई थी। इसी तरह नानकमत्ता विधानसभा क्षेत्र में दर्ज 391 फॉर्म-7 आवेदनों में से 353 फॉर्म-7 अकेले भाजपा बीएलए किशोर जोशी के नाम से जमा कराए गए थे। रुड़की विधानसभा के सालियर गांव में भाजपा जिला पंचायत सदस्य जितेन्द्र कुमार और भाजपा नेता राजीव त्यागी द्वारा एक साथ दर्जनों फॉर्म-7 जमा कराने पर कांग्रेस विधायक वीरेंद्र जाती से तीखी नोकझोंक हुई। वहीं, झबरेड़ा में भाजपा बीएलए-2 मांगेराम सिरोही समेत कई कार्यकर्ताओं ने बाद में हलफनामा (Affidavit) देकर सनसनीखेज खुलासा किया कि उनके ईपिक (EPIC) नंबर और फर्जी हस्ताक्षरों का उनकी जानकारी के बिना दुरुपयोग करके आपत्तियां लगाई गई थीं।
क्या उत्तराखंड में भी होगा लीगल एक्शन?
कर्नाटक और उत्तराखंड के मामलों में सीधी समानता यह है कि दोनों जगह बिना किसी पूर्व सत्यापन के कर्नाटक में चुनाव प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए और पुलिस ने धारा 353 (BNS) के तहत प्राथमिकी दर्ज कर यह संदेश दिया है कि मतदाता सूची के साथ खिलवाड़ एक दंडनीय अपराध है। ऐसे में उत्तराखंड प्रशासन और पुलिस पर भी यह नैतिक और कानूनी दबाव बन गया है कि वे फर्जी आपत्तियों, फर्जी हस्ताक्षरों और प्रणाली के दुरुपयोग की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करें। अब देखना यह होगा कि क्या उत्तराखंड में भी कर्नाटक की तर्ज पर दंडात्मक कार्रवाई होती है या मामला केवल बयानों तक सीमित रहता है। हालांकि उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी वीवीआरसी पुरुषोत्तम कह चुके हैं फर्जी तरीके से फॉर्म-7 के जरिए नाम कटवाने के प्रकरणों की पहले जांच की जाएगी उसके बाद कानून के हिसाब से कार्रवाई होगी।



