
देहरादून – पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत अब अपने इस्तीफे की पेशकश को लेकर पार्टी हाईकमान से मुलाकात करेंगे। रावत ने कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी और राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य पदों से इस्तीफे की पेशकश की है। यह पेशकश उनके पूर्व ओएसडी चंदन सिंह जीना के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई के बाद सामने आई थी।
दिल्ली में लंबे समय से रह रहे रावत ने सोमवार को इंटरनेट मीडिया पर वीडियो जारी कर कहा कि वह अपनी पेशकश को लेकर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात करेंगे। इसके लिए उन्होंने खरगे से समय मांगा है। रावत ने कहा कि वह प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल को भी पत्र भेजेंगे, क्योंकि देहरादून जाकर मुलाकात करने में दूरी आड़े आ रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने ऐसी कोई पेशकश नहीं की है, जिससे किसी को नाराज या परेशान होने की जरूरत हो। उन्होंने कहा कि कांग्रेस प्रदेश में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर लड़ाई लड़ रही है। उनकी वजह से इस लड़ाई में किसी तरह का व्यवधान न हो, इसलिए उन्होंने इस्तीफे की पेशकश की है।
रावत ने कहा कि यदि इस लड़ाई में वह या उनका कोई कृत्य आड़े आ रहा है तो उन्हें पीछे हटने में कोई संकोच नहीं है। ईडी की कार्रवाई को लेकर उन्होंने कहा कि सरकार या जिसने भी कार्रवाई की है, वह अपने स्तर पर जाने। उन्होंने कर्म के फल का उल्लेख करते हुए कहा, “ऊधो कर्मन गति टारे न टरे।” उनका कहना था कि कर्म में जो लिखा होगा, उसका सामना करना ही पड़ेगा।
ईडी की कार्रवाई से कांग्रेस में हलचल –
गौरतलब है कि वर्ष 2016 में हरीश रावत के मुख्यमंत्रित्वकाल में हुई ग्राम पंचायत विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा में अनियमितता से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने गुरुवार को चंदन सिंह जीना के देहरादून स्थित तपोवन आवास पर छापा मारा था। जीना उस समय रावत के ओएसडी थे और वर्तमान में वैयक्तिक सहायक हैं।
ईडी की कार्रवाई के दौरान करीब 32 लाख रुपये की बेहिसाबी नकदी, लगभग 200 ग्राम सोना और कीमती घड़ियां बरामद होने की बात सामने आई है। कार्रवाई के बाद यह मामला प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है और कांग्रेस के भीतर भी हलचल तेज हो गई है।

