उत्तराखण्ड

‘जेनी मामले’ पर गोदियाल बोले, असल मुद्दों से ध्यान हटाने की चाल, माले ने भी उठाए सवाल

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Godiyal on the 'Jenny case': A ploy to divert attention from real issues; the CPI(ML) also raises questions.

उत्तराखंड की  राजनीति में एक बार फिर से लगभग ढाई दशक पुराना ‘जेनी मामला’ अचानक सुर्खियों में आ गया है। इस पुराने मामले के फिर से तूल पकड़ने के बाद राज्य का सियासी पारा काफी हाई हो गया है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सरकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, और इसे राज्य के असली मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने की एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश करार दिया है।

नक्शेदेखें

कांग्रेस का तीखा हमला: 23 साल बाद ही क्यों उठा मामला?

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस मामले के अचानक सामने आने पर बड़ा सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि आखिर 23 साल बाद ही इस मामले को फिर से क्यों उठाया गया? मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पार्टी द्वारा प्रदेश के जनहित में उठाई जा रही जोरदार आवाज़ को दबाने और जनता का ध्यान भटकाने के लिए यह सियासी हल्ला मचाया है। गोदियाल ने आरोप लगाया कि वर्तमान में अंकिता भंडारी हत्याकांड में वीआईपी को राज्यपाल बनाए जाने का प्रकरण, मुख्यमंत्री के अधीन विभागों में भ्रष्टाचार के मामले, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी पर आय से अधिक संपत्ति के आरोप, धन सिंह रावत के विभागों में चल रहा भ्रष्टाचार और रेखा आर्य और पप्पू-गिरधारी जैसे ऐसे गंभीर मुद्दे चल रहे थे जो भाजपा सरकार को पूरी तरह असहज कर रहे थे। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इन तमाम गंभीर मामलों पर कांग्रेस लगातार भाजपा की पोल खोल रही थी और प्रदेश की जनता के बीच तेजी से आगे बढ़ रही थी। ऐसे में, इन ज्वलंत और जनहित से जुड़े असल मुद्दों को दबाने के लिए ही 23 साल पुराने इस मामले को हवा दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी को देश की न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा पूरा भरोसा है। कानून अपना काम करे, और यदि इस मामले में कोई नई बात सामने आई है तो कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाए—कांग्रेस इसके रास्ते में कभी नहीं आएगी। इसके साथ ही उन्होंने दो टूक कहा कि कांग्रेस जनता के हितों, भ्रष्टाचार और सरकारी जमीनों के अवैध मामलों पर अपनी आवाज़ आगे भी पूरी ताकत से बुलंद करती रहेगी।

नीतियांदेखें

प्रेस कॉन्फ्रेंस से दो दिन पहले ही डीजीपी से मिल चुकी थी जेनीः मैखुरी

इस पूरे विवाद में वाम दलों ने भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भाकपा माले के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी ने इस मामले में पुलिस प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि असम से देहरादून पहुंची जेनी न केवल एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में नजर आईं, बल्कि उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक (DGP) दीपम सेठ के साथ भी उनकी मुलाकात चर्चा का विषय बन गई है। मैखुरी ने कहा कि जेनी के पत्र पर पड़ी तारीख से साफ पता चलता है कि वह प्रेस कॉन्फ्रेंस से दो दिन पहले ही डीजीपी दीपम सेठ से मुलाकात कर चुकी थीं। ऐसे में यह एक बड़ा सवाल है कि मुलाकात के दो दिन बाद फोटो सार्वजनिक होने का क्या गणित था? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि चलो जेनी के बहाने ही सही, भूमिगत रहने वाले पुलिस महानिदेशक कम से कम नजर तो आए।

पक्षपात और आम जनता की अनदेखी का आरोप

माले राज्य सचिव ने आरोप लगाया कि जब से दीपम सेठ डीजीपी बने हैं, शायद यह पहला मौका होगा जब उन्होंने किसी की शिकायत पर सीधे किसी से मुलाकात की हो। उन्होंने उत्तराखंड के पिछले डीजीपी चाहे वह प्रेम दत्त रतूड़ी हों, अशोक कुमार हों, या पूर्ववर्ती कार्यवाहक डीजीपी अभिनव कुमार होंका जिक्र करते हुए कहा कि वे सभी आम जनता से आसानी से मिलते थे और फोन या व्हाट्सएप पर भी प्रतिक्रिया देते थे। लेकिन इसके विपरीत, मौजूदा डीजीपी पुलिस मुख्यालय के पर्दों में छिपे रहते हैं। उन्होंने कहा कि पहले डीजीपी से लेकर थाने तक के सरकारी मोबाइल नंबर उत्तराखंड पुलिस की वेबसाइट पर उपलब्ध होते थे, जिन्हें अब हटवा दिया गया है। मैखुरी ने आरोप लगाया कि दीपम ऐसे मामलों या बाहरी लोगों से ही मिलते हैं जिनसे सत्ता में बैठी भाजपा को राजनीतिक लाभ मिलने की उम्मीद होती है। जब तक वे संवैधानिक पद पर हैं, तब तक उनके आचरण पर सवाल उठते रहेंगे और जवाबदेही की मांग की जाती रहेगी

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News100Live Desk
टीम न्यूज़ 100 लाइव