
हल्द्वानी, शहर को जाम से निजात दिलाने के लिए प्रस्तावित रिंग रोड की कवायद अब आगे बढ़ी है। अब रिंग रोड की जद में आने वाली जमीनों का सर्वे कर चिह्नीकरण किया जाएगा। वन विभाग, लोक निर्माण विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम इस काम को अंजाम देगी। टीम यह पता लगाएगी कि प्रस्तावित रिंग रोड के दायरे में कितनी निजी, वन और राजस्व विभाग की जमीन आ रही हैं। सर्वे पूरा होने के बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होगी। हल्द्वानी में करीब 18.6 किलोमीटर लंबी रिंग रोड प्रस्तावित है। इसका निर्माण रामपुर रोड स्थित बेलबाबा से लामाचौड़ तक किया जाना है। रिंग रोड बनने से शहर के भीतर से गुजरने वाले वाहनों का दबाव कम होगा। खासकर बाहरी क्षेत्रों से आने वाले वाहनों को शहर के व्यस्त मार्गों में प्रवेश किए बिना आगे निकलने का विकल्प मिल सकेगा। इससे शहर के प्रमुख चौराहों और सड़कों पर लगने वाले जाम से राहत मिलेगी। हालांकि, डीपीआर तैयार करने से पहले जमीनों की वास्तविक स्थिति पता लगाया जाएगा। इसी के तहत तीनों विभागों के अधिकारी संयुक्त रूप से प्रस्तावित मार्ग का सर्वे करेंगे। इसमें किसानों की निजी भूमि के साथ वन और राजस्व विभाग की जमीन का भी ब्योरा जुटाया जाएगा। जमीनों के चिह्नीकरण से यह स्पष्ट हो सकेगा कि परियोजना के निर्माण में कहां भूमि अधिग्रहण या वन भूमि हस्तांतरण की जरूरत पड़ सकती है। अतिक्रमण की स्थिति के बारे में पता लगाया जाएगा।प्रस्तावित रिंग रोड को शहर के यातायात से जोड़ने के लिए तीन स्थान भी चिह्नित किए गए हैं। इसमें आरटीओ रोड पर आनंदपुर मोड़, पाल कॉलेज के पीछे और कमलुवागांजा में नोवा फैक्ट्री के पास रिंग रोड से शहर का ट्रैफिक जुड़ेगा। इससे शहर के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले वाहनों को रिंग रोड तक पहुंचने में आसानी होगी। फिलहाल जमीनों के सर्वे और चिह्नीकरण की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार है। इसके बाद डीपीआर तैयार होगी।
जमीनों के सर्वे में स्थिति होगी स्पष्ट
रिंग रोड की जद में आने वाली जमीनों का सर्वे किया जाएगा। जिसमें जमीन की स्थिति, किस विभाग की कितनी जमीन और अतिक्रमण क्या स्थिति है स्पष्ट होगी।-प्रत्यूष कुमार, अधिशासी अभियंता लोनिवि हल्द्वानी



