
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड कांग्रेस की सियासत में हरीश रावत के परिवार की अगली पीढ़ी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने खुलकर इच्छा जताई है कि उनके छोटे बेटे आनंद रावत इस बार चुनावी मैदान में उतरें। शहरऔर स्थानीय मार्गदर्शिका
हरीश रावत ने मांगा बेटे आनंद रावत के लिए टिकट
हरीश रावत ने अपनी पार्टी नेतृत्व को संकेत दिया है कि जिस सीट पर कांग्रेस लंबे समय से चुनाव नहीं जीत सकी है और वहां कोई मजबूत दावेदार नहीं है, तो आनंद को मौका दिया जा सकता है। हरीश रावत के मुताबिक, आनंद रावत ने ऐसी सीट चुनी है, जहां कांग्रेस 1984 से जीत दर्ज नहीं कर पाई है।
हरदा ने कहा कि उनकी इच्छा है कि उनकी “उत्तराखंडियत” की सोच को आगे बढ़ाने वाला उनका बेटा राजनीति में अपनी भूमिका निभाए। हालांकि, रावत ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर किसी सीट पर पहले से किसी अन्य कांग्रेस नेता का मजबूत दावा है, तो उसके अधिकार को दरकिनार कर आनंद को टिकट नहीं दिया जाना चाहिए।
हरदा ने दिया अपनी बेटी का उदहारण
हरीश रावत ने अपने राजनीतिक परिवार का जिक्र करते हुए अपनी बेटी अनुपमा रावत का भी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि अनुपमा ने हरिद्वार ग्रामीण सीट को चुना था, जिस पर कांग्रेस लंबे समय से जीत नहीं पाई थी। रावत ने कहा कि पिछली बार वहां से उन्होंने चुनाव लड़ा और हार का सामना किया, लेकिन अनुपमा आज भी अपने राजनीतिक मैदान में डटी हुई हैं। राजनीति
हरदा ने किया अपने पुराने फैसलों का जिक्र
आनंद रावत की राजनीतिक दावेदारी को लेकर हरीश रावत ने अपने पुराने फैसलों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कई मौकों पर उन्होंने खुद अपने बेटे के चुनाव लड़ने का अवसर रोका। लालकुआं से टिकट मांगने के समय भी उन्होंने पार्टी हित में अलग फैसला लिया। इसके बाद 2017 में आनंद ने जसपुर से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई, लेकिन वहां पार्टी ने आदेश चौहान को उम्मीदवार बनाया। रावत के मुताबिक, उस समय उन्होंने आनंद से कहा था कि “वेट, योर टर्न विल कम।”
चर्चा में परिवारवाद बनाम राजनीतिक दावेदारी की बहस
अब 2027 के चुनाव से पहले हरीश रावत का यह बयान कांग्रेस के भीतर टिकट को लेकर चल रही संभावित दावेदारी के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खास बात यह है कि रावत ने खुद अपने बेटे को टिकट दिए जाने की इच्छा जाहिर करने के साथ इसे “यही परिवारवाद है” भी कहा। ऐसे में उनके बयान ने कांग्रेस की राजनीति में परिवारवाद बनाम राजनीतिक दावेदारी की बहस को फिर चर्चा में ला दिया है।
