One Nation One Election: हरिद्वार संत समागम में ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ और ‘संपूर्ण वंदे मातरम्’ के समर्थन में प्रस्ताव पारित हुआ। शिवराज सिंह चौहान और CM धामी की मौजूदगी में संतों ने इसे जन-आंदोलन बनाने का संकल्प लिया।
One Nation One Election: उत्तराखंड एक बार फिर से भाजपा और संघ की सनातन राजनीति का केंद्र बनने जा रहा है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होना है। इस वर्ष देश के पांच और प्रदेशों में भी विधानसभा का चुनाव है। इसको देखते हुए भाजपा व संघ एक राष्ट्र एक चुनाव और वंदे मातरम् संपूर्ण गीत मुद्दों को लेकर राष्ट्रीय आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।
नीट पेपर लीक के बाद देश में जगह जगह पर छात्र आंदोलन और सोशल मीडिया पर भाजपा विरोधी माहौल को हवा मिलने से उपजी स्थिति को देखते हुए इस राष्ट्रीय आंदोलन से भाजपा व संघ को उम्मीदें हैं। हरिद्वार में पिछले दिनों भाजपा और संघ के कार्यकर्ताओं ने एक मंच बनाकर संत समागम का आयोजन किया।
एक देश एक चुनाव को लेकर
इस समागम में साधु संतों ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मौजूदगी में एक राष्ट्र-एक चुनाव और वंदे मातरम् संपूर्ण गीत के मुद्दों के समर्थन में प्रस्ताव पारित किए। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने संत समाज से आह्वान किया कि वे अपने प्रवचनों में वंदे मातरम् के पूरे स्वरूप का समर्थन करें और जनता में यह भावना जगाएं कि देश की मातृभूमि की वंदना में कोई विवाद नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब संतों की आवाज से जनजागरण होगा, तो कोई भी वंदे मातरम् के पूरे गान का विरोध करने का साहस नहीं कर पाएगा। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संत-महात्माओं से इन महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय विषयों पर समाज का मार्गदर्शन करने का आग्रह करते हुए कहा कि भारत की सनातन परंपरा में संत समाज ने सदैव राष्ट्र और समाज को दिशा देने का कार्य किया है।
तुष्टीकरण के नाम पर विरोध
उन्होंने कहा कि हमारा संकल्प है कि लोकतंत्र मजबूत हो, विकास निरंतर हो, संस्कृति सुरक्षित हो और राष्ट्र सर्वोपरि रहे और अब एक राष्ट्र-एक चुनाव और संपूर्ण वंदे मातरम् गीत के मुद्दे पर साधु संतों का आशीर्वाद प्राप्त हो गया है तो यह दोनों लक्ष्य भी जल्दी ही प्राप्त होंगे। संत समागम में देश भर से आए साधु संतों ने कहा कि इस समय देश के सामने एक राष्ट्र-एक चुनाव और वंदे मातरम् संपूर्ण गीत महत्त्वपूर्ण मुद्दे हैं और जो इन लोगों का मुस्लिम तुष्टीकरण के नाम पर विरोध कर रहे हैं, वह राष्ट्रद्रोही हैं और उनके खिलाफ वंदे मातरम् संपूर्ण गीत का विरोध करने को लेकर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा किया जाना चाहिए।
इस अवसर पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत डा. रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि आज देश को एक राष्ट्र एक चुनाव और वंदे मातरम् के संपूर्ण गीत की बहुत आवश्यकता है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री महंत हरिगिरि महाराज ने कहा कि एक राष्ट्र एक चुनाव और वंदे मातरम् संपूर्ण गीत के मुद्दे पर समस्त साधु समाज प्रधानमंत्री मोदी के साथ खड़ा है और हम राष्ट्रवादी ताकतों को हमेशा करारा जवाब देते रहेंगे।
संतों ने खुलकर किया वन नेशन वन इलेक्शन का समर्थन
योग गुरु स्वामी रामदेव ने कहा कि एक राष्ट्र एक चुनाव का हम समर्थन करते हैं। महामंडलेश्वर प्रबोधानंद महाराज ने कहा कि केंद्र सरकार को और भी अधिक कड़ा कानून बनाना चाहिए ताकि कोई कभी सपने में भी वंदे मातरम् संपूर्ण गीत का विरोध करने की ना सोच सके। संत समागम में सभी तेरह अखाड़ों के महंत, आचार्य महामंडलेश्वर, महामंडलेश्वर और साधु संत बड़ी तादाद में उपस्थित थे। संत समागम का संचालन महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद महाराज ने किया और महामंडलेश्वर रूपेंद्र प्रकाश महाराज ने सभी का आभार जताया।
दरअसल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी राम मंदिर आंदोलन की तरह एक राष्ट्र-एक चुनाव और वंदे मातरम् संपूर्ण गीत को लेकर देश भर के साधु संतों को एकजुट करने में लगी हुई है, जिस तरह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने विश्व हिंदू परिषद के बैनर तले साधु संतों का एक मंच केंद्रीय मार्गदर्शन मंडल बनाया था और साधु संतों को इस मंच के बहाने राम मंदिर आंदोलन को धार देने के लिए एकजुट किया था और यह मार्गदर्शन मंडल संघ के मुद्दों पर अपनी मोहर लगाता था और विश्व हिंदू परिषद के बैनर तले राम मंदिर आंदोलन के मुद्दों को जनता के बीच ले जाकर उसे जन आंदोलन का रूप देता था।
वहीं बाद में विश्व हिंदू परिषद का यह जंजपा के चुनावी एजंडा में शामिल हो गया और भाजपा की केंद्र में सरकार बन गई और अब 2027 के उत्तर भारत के कुछ राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव और 2029 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा एक राष्ट्र-एक चुनाव और संपूर्ण वंदे मातरम् गीत को जन मुद्दा बनाकर फिर से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में अपनी सरकार बनाना चाहती है और फिर 2029 में केंद्र में लगातार चौथी बार काबिज होना चाहती है।
एक देश, एक चुनाव- का मुद्दा केवल चुनावी सुधार के सवाल तक नहीं बल्कि क्षेत्रीय दलों के भविष्य से भी जुड़ गया है। बिहार चुनाव से पहले जब केन्द्र की भाजपा सरकार ने जाति जनगणना कराए जाने का फैसला लिया था। कांग्रेस और विपक्षी दल खासकर राष्ट्रीय जनता दल और समाजवादी पार्टी ने इसका क्रेडिट खुद लिया। लेकिन पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद ऐसा लग रहा है कि उत्तर प्रदेश चुनाव में विधानसभा चुनाव होने से पहले ही देश का लोकतांत्रिक सिस्टम दो दलीय हो जाएगा।

