उत्तराखण्ड

लिथुआनिया की राजदूत से मिले उत्तराखंड के संस्कृत सचिव, भाषा की विरासत पर हुई चर्चा

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उत्तराखंड सरकार के संस्कृत शिक्षा, कार्यक्रम क्रियान्वयन और जनगणना विभाग के सचिव दीपक कुमार ने नई दिल्ली में लिथुआनिया की राजदूत महामहिम डायना मिकेविचिएने से मुलाकात की। इस दौरान दोनों के बीच संस्कृत भाषा की समृद्ध विरासत, उसके संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके बढ़ते प्रभाव को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।

लिथुआनिया की राजदूत से मिले उत्तराखंड के संस्कृत सचिव

दीपक कुमार ने उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान के बारे में बताते हुए कहा कि ये देश का एकमात्र राज्य है जहां संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का दर्जा मिला है।

उन्होंने राजदूत को उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा निदेशालय, संस्कृत शिक्षा परिषद्, संस्कृत विश्वविद्यालय, संस्कृत संस्थानम और राज्य में संस्कृत शिक्षा व अनुसंधान को सुदृढ़ करने के लिए कार्यरत विभिन्न संस्थाओं द्वारा संस्कृत के संरक्षण, संवर्धन और प्रसार के लिए संचालित अनेक योजनाओं और गतिविधियों की जानकारी दी।

उत्तराखंड सरकार ने हर एक जिले में की संस्कृत ग्राम की स्थापना

उन्होंने आगे बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दूरदर्शी नेतृत्व और भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के सहयोग से अगस्त 2025 में उत्तराखंड सरकार ने राज्य के हर एक जिले में एक-एक संस्कृत ग्राम की स्थापना कर दी है। कुल 13 संस्कृत ग्राम विकसित किए गए हैं। जिन्हें संस्कृत के जीवंत केन्द्रों के रूप में विकसित किया गया है। जहां स्थानीय समुदायों द्वारा दैनिक जीवन और सामाजिक व्यवहार में संस्कृत का सक्रिय रूप से प्रयोग किया जाता है।

‘मन की बात’ कार्यक्रम में पीएम मोदी ने भी संस्कृत का किया प्रचार

सचिव दीपक कुमार ने महामहिम राजदूत को इन संस्कृत ग्रामों में से किसी एक के भ्रमण के लिए मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया। इस अवसर पर वे प्रत्यक्ष रूप से अनुभव कर सकेंगी कि संस्कृत आज भी स्थानीय जनजीवन में एक जीवंत भाषा के रूप में किस प्रकार फल-फूल रही है।

उन्होंने लिथुआनिया के विख्यात संस्कृत विद्वान प्रो. वितिस विदूनास को संस्कृत अध्ययन और अनुसंधान के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए शुभकामनाएं और बधाई भी प्रेषित की। उन्होंने स्मरण कराया कि अगस्त 2024 में प्रसारित ‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी संस्कृत के प्रचार-प्रसार में प्रो. विदूनास के योगदान का विशेष उल्लेख किया था।

राजदूत ने संस्कृत शब्दकोश भेंट की

भेंट वार्ता के दौरान राजदूत डायना मिकेविचिएने ने दीपक कुमार को एक विशेष संस्कृत शब्दकोश भेंट किया। उन्होंने बताया कि इस प्रकाशन में संस्कृत और लिथुआनियाई भाषाओं के 108 ऐसे शब्दों की पहचान की गई है। जिनकी ध्वनि और अर्थ दोनों में उल्लेखनीय समानता पाई जाती है। शताब्दियों से इन भाषाई समानताओं का संरक्षित रहना दोनों प्राचीन सभ्यताओं के गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का परिचायक है तथा संस्कृत की समृद्धि और उसकी शाश्वत विरासत को भी उजागर करता है।

भारत और लिथुआनिया के संबंधों को करेगा मजबूत

राजदूत ने आगे ये भी जानकारी दी कि प्रो. वितिस विदूनास वर्तमान में एक व्यापक संस्कृत शब्दकोश पर कार्य कर रहे हैं। जिसमें ऐसे एक हजार से अधिक समानार्थी शब्दों का संकलन किया जा रहा है। ये आगामी प्रकाशन तुलनात्मक भाषाविज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान सिद्ध होगा और भारत और लिथुआनिया के मध्य शैक्षणिक और सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करेगा।

बताते चलें कि लिथुआनिया के विल्नियस विश्वविद्यालय में कई दशकों से भारतीय भाषाओं, विशेषकर हिन्दी और संस्कृत का अध्ययन-अध्यापन किया जा रहा है। वर्ष 1996 में विश्वविद्यालय के ओरिएंटल स्टडीज़ विभाग के अंतर्गत भारतीय अध्ययन केन्द्र की स्थापना की गई थी। अगस्त 2006 में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद् के सहयोग से विश्वविद्यालय ने भारतीय अध्ययन विषयक मध्य और पूर्वी यूरोप के द्वितीय क्षेत्रीय सम्मेलन की मेजबानी भी की थी

News100Live Desk
टीम न्यूज़ 100 लाइव