उत्तराखण्ड

उत्तराखंड में सरकारी तबादलों को पारदर्शी और आसान बनाने की तैयारी, शासन ने विभागों से मांगे सुझाव

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Preparations underway to make government transfers in Uttarakhand transparent and easier ; suggestions from various departments.

उत्तराखंड में  सरकारी कर्मचारियों के सालाना तबादलों (वार्षिक स्थानांतरण) की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी, व्यावहारिक और एकरूप बनाने के लिए शासन ने सख्त और बड़े कदम उठाए हैं। अक्सर तबादला सत्र के दौरान आने वाली अड़चनों और नियमों की उलझनों से पार पाने के लिए शासन ने प्रदेश के सभी विभागों से इस अधिनियम के लागू होने में आ रही दिक्कतों का पूरा ब्योरा मांगा है। इस संबंध में अपर सचिव गिरधारी सिंह रावत की ओर से सभी प्रमुख सचिवों, सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को आधिकारिक निर्देश जारी किए गए हैं। सभी संबंधित विभागों को हिदायत दी गई है कि वे महज एक हफ्ते के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट कार्मिक एवं सतर्कता विभाग को अनिवार्य रूप से सौंप दें।

नक्शेदेखें

क्या है पूरा मामला और नियम?

राज्य  सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के तबादलों के लिए ‘उत्तराखंड लोक सेवक वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम, 2017’ लागू कर रखा है। इस कानून का मुख्य मकसद तबादला प्रक्रिया में पूरी तरह से पारदर्शिता लाना, वस्तुनिष्ठता (ऑब्जेक्टिविटी) और एकरूपता सुनिश्चित करना है, ताकि किसी भी स्तर पर मनमानी की गुंजाइश न बचे। इसके लिए कानून में एक तय समय-सारिणी और पूरी प्रक्रिया पहले से ही निर्धारित की गई है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि जब-जब तबादला सत्र आता है, तब-तब अलग-अलग विभागों को इसके कुछ प्रावधानों और धाराओं को लागू करने में भारी व्यावहारिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

क्यों आ रही हैं दिक्कतें?

शासन का मानना है कि हर विभाग की अपनी अलग संवर्गीय संरचना (कैडर स्ट्रक्चर) होती है। इसके अलावा तकनीकी और विशेष प्रकृति के पदों की उपलब्धता, साथ ही पहाड़ी (दुर्गम) और मैदानी (सुगम) क्षेत्रों में पदों का असमान वितरण होने के कारण कई बार पूरी तबादला प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है। इसके अतिरिक्त, सेवा अवधि (सर्विस पीरियड) की सही गणना करने और कानून की अलग-अलग धाराओं के मतलब को लेकर भी रोज नई उलझने सामने आती हैं। इन सब वजहों से कई विभाग बार-बार कार्मिक एवं सतर्कता विभाग से अलग-अलग मामलों में मार्गदर्शन, नियमों में छूट या ढील देने के प्रस्ताव भेजने लगते हैं। शासन ने पाया है कि इस तरह के बार-बार आने वाले प्रस्तावों से न सिर्फ समय पर तबादले होने की प्रक्रिया बाधित होती है, बल्कि पूरी तबादला नीति में एकरूपता बनाए रखना भी मुश्किल हो जाता है और प्रशासनिक पत्राचार का बोझ बेमतलब बढ़ जाता है।

अब स्थायी समाधान की तलाश

इन तमाम समस्याओं से हमेशा के लिए निजात पाने के लिए शासन ने सभी विभागों को निर्देश दिया है कि वे अपने यहां ‘वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम, 2017’ के क्रियान्वयन में आ रही वास्तविक और जमीनी समस्याओं का बहुत गहराई से विश्लेषण करें। यदि कानून की किसी धारा या उपधारा की वजह से ट्रांसफर में कोई नीतिगत, कानूनी या कैडर से जुड़ी रुकावट आ रही है, तो उसके स्थायी समाधान के लिए नियमों में जरूरी संशोधन या स्पष्टीकरण का पुख्ता प्रस्ताव तैयार किया जाए। शासन ने यह भी साफ किया है कि इन प्रस्तावों में केवल उन्हीं बड़ी अड़चनों और कठिनाइयों को शामिल किया जाना चाहिए, जो कानून के प्रावधानों या कानूनी बाध्यता के कारण पैदा हो रही हैं। इसमें किसी भी तरह के व्यक्तिगत मामलों, सिफारिशों या तात्कालिक प्रशासनिक जरूरतों से जुड़े मुद्दों को बिल्कुल शामिल न किया जाए।

क्या है इस कवायद के पीछे सरकार का उद्देश्य

इस कवायद के पीछे सरकार का मुख्य लक्ष्य इस पूरी प्रक्रिया को कर्मचारियों और प्रशासन दोनों के लिए बेहद आसान बनाना है, ताकि बार-बार की कागजी कार्रवाई से बचा जा सके। एक हफ्ते के भीतर सभी विभागों से मिलने वाले इन ठोस सुझावों के आधार पर सरकार भविष्य में तबादला नीति को और अधिक व्यावहारिक रूप देगी, जिससे हर विभाग में नियमों का एक जैसा और पारदर्शी पालन सुनिश्चित हो सके

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News100Live Desk
टीम न्यूज़ 100 लाइव