
हल्द्वानी : राज्य के कई राजकीय मेडिकल कॉलेजों के एमबीबीएस इंटर्न छात्रों द्वारा ब्लैक रिबन प्रोटेस्ट के माध्यम से अपने लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर एक प्रतीकात्मक आंदोलन की शुरुआत की गई। इसी क्रम में राजकीय मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी के एमबीबीएस इंटर्न छात्रों ने हाथ पर काली पट्टी (Black Ribbon) बांधकर अपना विरोध दर्ज कराया।
इंटर्न छात्रों की प्रमुख मांग है कि उत्तराखंड सरकार द्वारा एमबीबीएस इंटर्न छात्रों को दिए जाने वाले वर्तमान स्टाइपेंड को ₹17,000 प्रतिमाह से बढ़ाकर ₹30,000 प्रतिमाह किया जाए।
छात्रों का कहना है कि वर्तमान में दिया जा रहा ₹17,000 प्रतिमाह स्टाइपेंड, इंटर्नशिप के दौरान किए जाने वाले कार्य की प्रकृति, कार्य के घंटों तथा जिम्मेदारियों के अनुरूप पर्याप्त नहीं है। लगातार बढ़ती महंगाई को देखते हुए इस राशि में छात्रों के लिए हॉस्टल, भोजन, पुस्तकों, अध्ययन सामग्री, परिवहन एवं अन्य दैनिक आवश्यकताओं का खर्च वहन करना अत्यंत कठिन हो गया है।
एमबीबीएस की लगभग साढ़े चार वर्ष की कठिन एवं व्यस्त शैक्षणिक यात्रा पूरी करने के बाद इंटर्नशिप के दौरान छात्रों से अस्पतालों में नियमित रूप से महत्वपूर्ण चिकित्सकीय जिम्मेदारियां निभाने की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में वर्तमान स्टाइपेंड छात्रों पर आर्थिक दबाव बढ़ाने का कारण बन रहा है।
छात्रों का कहना है कि उनकी मांग किसी प्रकार की अतिरिक्त सुविधा की मांग नहीं, बल्कि उनके कार्य, जिम्मेदारियों और वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप सम्मानजनक स्टाइपेंड की मांग है।
इस संबंध में उत्तराखंड के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त, माननीय मुख्यमंत्री जी को भी छात्रों की मांगों से संबंधित ज्ञापन प्रेषित किया जा चुका है। अब आगामी बैठक में माननीय स्वास्थ्य मंत्री जी के समक्ष भी एमबीबीएस इंटर्न छात्रों की स्टाइपेंड संबंधी मांग को प्रमुखता से रखा जाएगा।
छात्रों ने स्पष्ट किया है कि ब्लैक रिबन प्रोटेस्ट आंदोलन का केवल प्रतीकात्मक प्रथम चरण है। यदि उत्तराखंड सरकार द्वारा छात्रों की जायज मांगों पर सकारात्मक एवं शीघ्र निर्णय नहीं लिया जाता है, तो भविष्य में आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से और अधिक व्यापक किया जाएगा।
एमबीबीएस इंटर्न छात्रों ने सरकार से अपील की है कि उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक एवं सकारात्मक विचार करते हुए वर्तमान स्टाइपेंड को ₹17,000 से बढ़ाकर ₹30,000 प्रतिमाह किया जाए, ताकि इंटर्न छात्रों को आर्थिक कठिनाइयों से राहत मिल सके और वे बिना अतिरिक्त आर्थिक दबाव के अपनी चिकित्सकीय जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकें
