नोएडा में ‘डिजिटल अरेस्ट’ के जरिए एक बुजुर्ग दंपति से 58 लाख रुपये की ठगी हुई। इसमें ठग खुद को पुलिस अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर डराते हैं और फर्जी मामले में फंसाकर पैसे ऐंठते हैं।
उत्तर प्रदेशः साइबर क्राइम का गढ़ बनते जा रहे नोएडा से एक और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। यहां एक बुजुर्ग दंपति से ठगों ने 58 लाख रुपये की मोटी रकम ऐंठ ली। ठगी को अंजाम देने के लिए जिस तरीके का इस्तेमाल किया गया, उसे ‘डिजिटल अरेस्ट’ कहा जाता है। यह घटना पिछले हफ्ते की है और एक पुलिस अधिकारी ने शुक्रवार को इसकी पुष्टि की।
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, स्कैमर्स ने बुजुर्ग दंपति को निशाना बनाया और उन्हें एक फर्जी मामले में फंसाकर उनसे 58 लाख रुपये अपने खाते में ट्रांसफर करवा लिए। यह रकम बताती है कि साइबर अपराधी कितने बड़े पैमाने पर और कितने शातिर तरीकों से लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं।
क्या होता है ‘डिजिटल अरेस्ट’?
‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर ठगी का एक नया और खतरनाक तरीका है। इसमें ठग खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या किसी दूसरी बड़ी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को फोन करते हैं। अक्सर यह कॉल स्काइप या किसी दूसरे वीडियो प्लेटफॉर्म पर की जाती है ताकि माहौल को और गंभीर बनाया जा सके।
इसके बाद वे पीड़ित को बताते हैं कि उनका नाम किसी बड़े आपराधिक मामले, जैसे मनी लॉन्ड्रिंग या ड्रग्स तस्करी में सामने आया है। वे पीड़ित को इतना डरा देते हैं कि वह किसी और से संपर्क नहीं कर पाता। उन्हें घर में ही ‘अरेस्ट’ कर लिया जाता है, यानी उन्हें किसी से बात करने या कहीं जाने से मना कर दिया जाता है।
फिर मामले को निपटाने या कानूनी प्रक्रिया के बहाने उनसे मोटी रकम की मांग की जाती है। डर के मारे लोग अपनी जीवन भर की कमाई इन ठगों के हवाले कर देते हैं। नोएडा में बुजुर्ग दंपति के साथ हुआ यह मामला दिखाता है कि कोई भी आसानी से इसका शिकार बन सकता है।

