उत्तराखण्ड

चमोली टनल हादसा: भारी बारिश से निर्माणाधीन सुरंग में घुसा पानी और मलबा, 16 मजदूरों का सुरक्षित रेस्क्यू; अपनों की जानकारी के लिए तुरंत मिलाएं ये हेल्पलाइन नंबर

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उत्तराखंड के चमोली जिले से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है, जहां पीपलकोटी क्षेत्र स्थित टीएचडीसी (विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना) की निर्माणाधीन सुरंग में भारी बारिश के बाद अचानक पानी, कीचड़ और मलबा भर जाने से कई श्रमिक अंदर ही फंस गए। घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ और भारतीय सेना की संयुक्त टीमों ने मोर्चा संभालते हुए युद्ध स्तर पर राहत व बचाव अभियान शुरू किया। रेस्क्यू टीमों की तत्परता और अदम्य साहस के चलते अब तक 16 श्रमिकों को सुरंग के गहरे दलदल से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। इस बीच, सुरंग में फंसे अन्य श्रमिकों की सुरक्षित वापसी के लिए अभियान लगातार जारी है और शासन-प्रशासन ने परिजनों की सुविधा के लिए आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर भी जारी कर दिए हैं।

चमोली टनल हादसे से जुड़े 10 बड़े अपडेट्स

  • 16 श्रमिकों का सफल रेस्क्यू: घटना के बाद हरकत में आई आपदा प्रबंधन टीमों ने सुरंग के भीतर फंसे श्रमिकों में से 16 को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है।
  • उत्तराखंड प्रशासन द्वारा हेल्पलाइन नंबर जारी: परिजनों की मदद के लिए राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) ने 0135-2710334, 82188 67005 और टोल-फ्री नंबर 1070 जारी किया है।
  • झारखंड सरकार का विशेष कंट्रोल रूम: हादसे में फंसे झारखंड के श्रमिकों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर 1800-3456-526 तथा व्हाट्सएप नंबर 9470132591 और 9431336472 चालू किए गए हैं।
  • सीएम पुष्कर सिंह धामी ने संभाली कमान: मुख्यमंत्री धामी खुद देहरादून स्थित राज्य आपदा संचालन केंद्र पहुंचे और उन्होंने अधिकारियों को राहत कार्य में तेजी लाने का कड़ा निर्देश दिया।
  • तमाक नाले के उफान से हुआ हादसा: पीपलकोटी के मायापुर क्षेत्र में तमाक नाले का जलस्तर अचानक बढ़ने से सुरंग के मुहाने पर तेजी से पानी और मलबा भर गया।
  • 5 प्रमुख एजेंसियों का साझा ऑपरेशन: मौके पर एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF), आईटीबीपी (ITBP), सीआईएसएफ (CISF) और सेना के जवान बचाव कार्य में पूरी ताकत झोंक चुके हैं।
  • घायलों का अस्पताल में इलाज जारी: रेस्क्यू किए गए श्रमिकों में से कुछ को मामूली चोटें आई हैं, जिन्हें तुरंत प्राथमिक उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल भेजा गया है।
  • हेवी डिवाटरिंग पंपों की तैनाती: टनल के अंदर जमा कई फीट गहरे पानी और दलदल को बाहर निकालने के लिए उच्च क्षमता वाले पंपों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
  • दो राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच बातचीत: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उत्तराखंड के सीएम से फोन पर बात कर अपने राज्य के मजदूरों की सुरक्षा को लेकर चर्चा की।
  • जिलाधिकारी मौके पर मौजूद: चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर ही डटे हुए हैं और पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहे हैं।

अचानक टनल में घुसा पानी और मलबा, जानिए कैसे हुआ हादसा

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में बीते कुछ दिनों से मानसूनी बारिश आफत बनकर बरस रही है। चमोली जिले के पीपलकोटी (मायापुर) क्षेत्र में अलकनंदा नदी पर बन रही विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना में कार्य चल रहा था। यह परियोजना टीएचडीसी (Tehri Hydro Development Corporation) की है और इसका निर्माण कार्य हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी (HCC) द्वारा किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, शाम के समय जब सुरंग के भीतर कई मजदूर अपनी नियमित शिफ्ट में काम कर रहे थे, तभी अचानक क्षेत्र में भीषण बारिश के बाद पास के तमाक नाले में जलस्तर अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया।

पानी के इस प्रचंड प्रवाह के साथ ही भारी मात्रा में कीचड़, बोल्डर और मलबा बहकर सुरंग के प्रवेश द्वार में जा घुसा। देखते ही देखते टनल का एक हिस्सा मलबे से बंद हो गया और पानी अंदर भरने लगा। टनल के भीतर मौजूद श्रमिकों में अफरा-तफरी मच गई और वे सुरक्षित स्थान की ओर भागने लगे, लेकिन जलस्तर तेजी से बढ़ने की वजह से लगभग 18 से 22 मजदूर अंदर ही फंस गए। घटना की खबर फैलते ही आसपास के इलाकों में हड़कंप मच गया और तुरंत ही स्थानीय पुलिस तथा आपातकालीन टीमों को सतर्क किया गया।

युद्ध स्तर पर जारी है रेस्क्यू ऑपरेशन, ग्राउंड जीरो की स्थिति

घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए राहत और बचाव टीमों को मौके पर रवाना किया। चमोली से पुलिस और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें सबसे पहले पहुंचीं। इसके बाद पास के क्षेत्रों और रुद्रप्रयाग से एनडीआरएफ (NDRF) की विशेष टीमों को तुरंत रवाना किया गया। इसके अलावा, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), सीआईएसएफ (CISF) और भारतीय सेना के जवानों ने भी बचाव दल में शामिल होकर रेस्क्यू मोर्चा संभाला।

रेस्क्यू टीमों ने सुरंग के मुहाने से मलबे को हटाने के लिए भारी मशीनों का सहारा लिया। शुरुआती कुछ घंटों की मशक्कत के बाद टीमों ने 8-8 करके कुल 16 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता हासिल की। हालांकि, सुरंग के भीतर अब भी पानी का रिसाव और दलदल होने के कारण बचाव अभियान में चुनौतियां आ रही हैं। बचाव दल ऑक्सीजन सिलेंडर, आपातकालीन लाइटें और बड़े डिवाटरिंग पंप लेकर टनल के अंदर दाखिल हुए हैं ताकि अंदर जमा पानी को जल्दी सुखाया जा सके और फंसे हुए अन्य लोगों तक पहुंचा जा सके।

श्रमिकों के परिजनों के लिए जरूरी हेल्पलाइन और संपर्क नंबर

हादसे की खबर मिलते ही फंसे हुए श्रमिकों के परिजनों में गहरी चिंता फैल गई है। कई मजदूर उत्तराखंड के स्थानीय निवासी हैं, जबकि कई अन्य मजदूर झारखंड, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों से आकर यहां काम कर रहे थे। परिजनों की सहायता और उन्हें सटीक जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उत्तराखंड राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (Dehradun SEOC) ने निम्नलिखित हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं:

  • उत्तराखंड कंट्रोल रूम फोन नंबर: 0135-2710334
  • इमरजेंसी मोबाइल नंबर: 82188 67005
  • टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर: 1070

इसके अलावा, झारखंड सरकार ने भी अपने राज्य के प्रभावित मजदूरों के परिवारों के लिए राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम स्थापित कर विशेष हेल्पलाइन जारी की है:

  • झारखंड राज्य हेल्पलाइन नंबर: 1800-3456-526
  • आधिकारिक व्हाट्सएप नंबर: 9470132591, 9431336472, 9431336427

परिजनों से अपील की गई है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और आधिकारिक नंबरों पर ही संपर्क कर सही स्थिति की जानकारी प्राप्त करें।

मुख्यमंत्री धामी ने दिए त्वरित मदद और हाई अलर्ट के निर्देश

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस घटना पर चिंता व्यक्त की है और पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं। देहरादून स्थित आपदा नियंत्रण कक्ष पहुंचकर उन्होंने स्थिति की व्यापक समीक्षा की और चमोली के जिलाधिकारी तथा पुलिस अधीक्षक को फोन कर दिशा-निर्देश दिए। सीएम धामी ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता टनल में फंसे हर एक व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालना है।

मुख्यमंत्री ने रेस्क्यू किए गए मजदूरों से फोन पर बात कर उनका हालचाल जाना और स्वास्थ्य अधिकारियों को घायलों के इलाज में कोई कमी न छोड़ने के निर्देश दिए। इसके साथ ही झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी सीएम धामी से फोन पर वार्ता कर झारखंड के मजदूरों के विषय में जानकारी ली। सीएम धामी ने उन्हें आश्वस्त किया कि पूरी सरकारी मशीनरी और केंद्रीय आपदा बल इस बचाव कार्य में जुटे हैं और सभी श्रमिकों को सुरक्षित बचा लिया जाएगा।

पहाड़ी इलाकों में जारी मानसूनी आफत और सुरक्षा निर्देश

उत्तराखंड में मानसून का मौसम हर साल अपने साथ प्राकृतिक आपदाओं का खतरा लेकर आता है। चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ जिलों में इस समय नदियां उफान पर हैं और पहाड़ों से लगातार भूस्खलन हो रहा है। पीपलकोटी के समीप हुई इस घटना ने एक बार फिर निर्माण स्थलों और पर्वतीय परियोजनाओं पर सुरक्षा इंतजामों को लेकर गंभीर ध्यान आकर्षित किया है। मौसम विभाग ने आगामी दिनों के लिए भी चमोली सहित कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। प्रशासन ने नदी-नालों के किनारे रहने वाले लोगों और निर्माण कार्य में जुटी कंपनियों को विशेष सावधानी बरतने तथा सतर्क रहने के सख्त निर्देश दिए हैं।

News100Live Desk
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