
उत्तराखंड में सड़क निर्माण के लिए हो रही पेड़ों की कटाई का स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने विरोध किया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इससे प्रदेश की प्राकृतिक विरासत, वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। उनका तर्क है कि जब वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध हैं, तो बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की आवश्यकता नहीं है।
प्रदर्शन में विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। उनका कहना है कि बरसात के मौसम में पेड़ लगाए जाते हैं, काटे नहीं जाते, जबकि इसी समय हरेला जैसे पर्यावरण संरक्षण से जुड़े पर्व भी मनाए जाते हैं। मामले में हाई कोर्ट ने यह कहते हुए हस्तक्षेप से इनकार किया कि यह विषय पहले से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। अब सभी की निगाहें 15 जुलाई को आने वाले सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर टिकी हैं

