उत्तराखण्ड

दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति पर घमासान, अब सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट ने केंद्र पर दागे गंभीर सवाल

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SDF objection to the appointment of Dushyant Gautam as Governor

दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का नया राज्यपाल नियुक्त किए जाने के फैसले पर देश की  राजनीति गरमा गई है। पूर्वोत्तर राज्य सिक्किम की प्रमुख विपक्षी पार्टी सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (SDF) ने इस नियुक्ति पर कड़ा ऐतराज जताते हुए केंद्र सरकार की नीयत और भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। बता दें कि इसके पहले सिक्किम विश्वविद्यालय स्टूडेंट यूनियन ने भी अंकिता मामले का उल्लेख करते हुए दुष्यंत गौतम की नियुक्ति का विरोध किया था। पार्टी की महिला विंग (चेली मोर्चा) की प्रभारी कोमल चामलिंग ने एक प्रेस बयान और वीडियो संदेश जारी कर कहा कि यह निर्णय सिक्किम की जनता की भावनाओं और महिलाओं की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ जैसा है। कोमल चामलिंग सिक्किम के सबसे लंबी अवधि तक मुख्यमंत्री रहे पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग की बेटी भी हैं।

क्या है पूरा विवाद?

दुष्यंत कुमार गौतम भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तराखंड के पार्टी प्रभारी रह चुके हैं। साल 2022 में उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में एक ‘वीआईपी’ का नाम सामने आया था। आरोप हैं कि रिसॉर्ट में काम करने वाली 19 साल की अंकिता पर एक वीआईपी को ‘स्पेशल सर्विस’ देने का दबाव बनाया गया था और मना करने पर उसकी हत्या कर दी गई थी। हाल ही में इस मामले में दुष्यंत गौतम का नाम उछलने के बाद राजनीतिक गलियारों में जमकर हंगामा मचा हुआ है। ऐसे विवादित पृष्ठभूमि वाले नेता को सिक्किम जैसे शांत और संवेदनशील राज्य का संवैधानिक प्रमुख (राज्यपाल) बनाए जाने पर एसडीएफ ने कड़ा विरोध जताया है।

नक्शेदेखें

एसडीएफ की महिला प्रमुख कोमल चामलिंग ने उठाए कई गंभीर सवाल

कोमल चामलिंग ने केंद्र सरकार और सिक्किम की मौजूदा राज्य सरकार (एसकेएम) को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि  जब किसी नेता का नाम इतने संगीन और संवेदनशील मामले से जुड़ा हो, तो उन्हें राज्यपाल जैसे गरिमामय पद से नवाजना महिलाओं के प्रति न्याय और जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
 उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने निर्णय लेते समय सिक्किम के लोगों की संवेदनशीलता और भावनाओं का ध्यान क्यों नहीं रखा? उन्होंने सिक्किम में बार-बार राज्यपाल बदले जाने पर भी चिंता जताई और पूछा कि संवैधानिक पदों के साथ ऐसा रवैया क्यों अपनाया जा रहा है?

नारी सुरक्षा केवल कागजी वादा नहीं हो सकती

कोमल चामलिंग ने अपने बयान में स्पष्ट कहा कि महिलाओं के अधिकार और सुरक्षा केवल चुनावी भाषणों या कागजी वादों तक सीमित नहीं रहने चाहिए। अगर सरकार महिलाओं के प्रति वाकई गंभीर है, तो उसे अपनी जवाबदेही तय करनी होगी। उन्होंने सिक्किम की महिलाओं से एकजुट होने का आह्वान करते हुए कहा कि एसडीएफ पार्टी न्याय और महिला सुरक्षा के मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगी।वहीं दूसरी ओर, अंकिता भंडारी के माता-पिता भी दुष्यंत गौतम की नियुक्ति के खिलाफ दिल्ली और उत्तराखंड में लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और उन्हें पद से हटाने की मांग कर रहे हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस नियुक्ति ने न केवल उत्तराखंड, बल्कि पूर्वोत्तर के राज्यों में भी एक नया राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है।

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News100Live Desk
टीम न्यूज़ 100 लाइव