उत्तराखण्ड

TET पर केंद्र का बड़ा फैसला!, लाखों शिक्षकों को मिल सकती है राहत?

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केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने देश भर के लाखों सेवाकालीन (कार्यरत) शिक्षकों को राहत देने और शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं को सुलझाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। 16 सितंबर को जारी एक आधिकारिक कार्यालय ज्ञापन के मुताबिक, केंद्र सरकार ने सेवाकालीन शिक्षकों के लिए TET ढांचे की व्यापक प्रशासनिक और विधायी समीक्षा करने का निर्णय लिया है।

शिक्षकों के लिए TET पास करने की अनिवार्यता एक बड़ा मुद्दा

असल में देश भर के कई राज्यों में सालों से पढ़ा रहे शिक्षकों के लिए TET पास करने की अनिवार्यता एक बड़ा मुद्दा बनी हुई थी। परीक्षाओं के अनियमित आयोजन और अचानक आए कानूनी बदलावों के कारण कार्यरत शिक्षकों के सामने पद और वेतन से जुड़ी अनिश्चितताएं पैदा हो रही थीं।

केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई इस व्यापक समीक्षा और RTE अधिनियम में संभावित संशोधन के विचार से लाखों शिक्षकों को एक बड़ी राहत और स्पष्टता मिलने की उम्मीद है। केंद्र के इस कदम का मुख्य उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के हालिया निर्देशों के बाद कार्यरत शिक्षकों के समक्ष उत्पन्न व्यावहारिक चुनौतियों का सहानुभूतिपूर्वक और कानूनन सही समाधान निकालना है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लिया गया निर्णय

शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी पत्र के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय ने सभी सेवाकालीन शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर दिशानिर्देश जारी किए थे। इसके बाद विभिन्न राज्यों में कार्यरत शिक्षकों की ओर से व्यावहारिक और संरचनात्मक कठिनाइयों को रेखांकित करते हुए कई रिप्रजेंटेशन प्राप्त हुए थे।

31 अगस्त 2028 तक का समय

अदालत के 1 सितंबर 2025 के फैसले और उसके बाद 29 मई 2026 को दिए गए आदेश के तहत शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक का समय दिया गया है। केंद्र सरकार का मानना है कि इस अवधि के दौरान एक ऐसा संक्रमणकालीन ढांचा तैयार किया जाए, जो कानूनी रूप से टिकाऊ हो और साथ ही शिक्षकों के करियर पर प्रतिकूल प्रभाव न डाले।

TET व्यवस्था में इन पहलुओं की होगी समीक्षा

शिक्षा मंत्रालय ने इस समीक्षा प्रक्रिया के तहत 5 मुख्य प्राथमिकताओं और उद्देश्यों को निर्धारित किया है। इसके लिए मौजूदा TET योग्यता मानदंडों की बारीकी से जांच की जाएगी ताकि शिक्षा के गुणवत्तापूर्ण मानकों को बनाए रखते हुए शिक्षकों के करियर की निरंतरता बनी रहे।

वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों के लिए व्यावहारिक रणनीतियां तैयार की जाएंगी, जिससे उन्हें नए कानूनी नियमों का पालन करने में न्यूनतम व्यवधान का सामना करना पड़े। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह निर्देश दिया जाएगा कि वे समय पर और नियमित रूप से TET परीक्षाएं (द्विवार्षिक या तय समय सीमा के भीतर) आयोजित करने के लिए अपने बुनियादी ढांचे में सुधार करें।

प्रासंगिक कानूनी ढांचे की जरूरत

सर्वसम्मति बनाने के लिए राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों, राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) और शिक्षा विशेषज्ञों के साथ मिलकर विचार-विमर्श किया जाएगा।

इस बदलाव को आसान बनाने के लिए प्रासंगिक कानूनी ढांचे, जैसे शिक्षा का अधिकार (RTE Act), में संभावित संशोधनों की तकनीकी और कानूनी व्यवहार्यता का पता लगाया जाएगा।

30 दिनों में मांगे गए सुझाव

मंत्रालय ने सभी संबंधित राज्य शैक्षणिक प्राधिकरणों और नोडल एजेंसियों से आग्रह किया है कि वे इस ज्ञापन के जारी होने की तिथि (16 सितंबर 2026) से 30 दिनों के भीतर अपनी क्षेत्रीय चुनौतियों और आंकड़ों पर आधारित सुझाव केंद्र सरकार को भेजें

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News100Live Desk
टीम न्यूज़ 100 लाइव