उत्तराखण्ड

मियांवाला का नाम बदलने पर भू-क़ानून संघर्ष समिति ने जताई आपत्ति, कही ये बात

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मूल निवास भू-क़ानून संघर्ष समिति ने मियांवाला का नाम बदलने पर आपत्ति जताई है. साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार अगर वभिन्न स्थानों के नाम बदल ही रही थी तो उत्तराखंड कि स्थानीय विभूतियों पर सरकार को नाम रखने चाहिए थे.

स्थानीय विभूतियों के नाम पर रखा जाना चाहिए था नाम : डिमरी

भू-क़ानून संघर्ष समिति के संयोजक मोहित डिमरी ने कहा कि सरकार ने देहरादून, नैनीताल, हरिद्वार और उधमसिंह नगर जिले के विभिन्न स्थानों के नाम बदल दिए हैं. अगर सरकार नाम बदल रही थी तो उसे उत्तराखंड की विभूतियों के नाम पर रखना चाहिए था. डिमरी ने कहा सरकार को इंद्रमणि बडोनी, चंद्र सिंह गढ़वाली, गिरीश चंद्र तिवारी “गिर्दा”, माधो सिंह भंडारी, बाबा मोहन उत्तराखंडी, कालू माहरा, श्रीदेव सुमन, केसरी चंद, नागेंद्र सकलानी, मोलू भरदारी, गौरा देवी, तीलू रौतेली, जयानंद भारती, बद्रीदत्त पांडे, सुमित्रानंदन पंत, सुंदरलाल बहुगुणा, शमशेर सिंह बिष्ट जैसे कई स्थानीय विभूतियों का नाम रखना चाहिए था, जिन्होंने पूरी दुनिया में उत्तराखंड का नाम रोशन किया है.

मियांवाला का नाम बदलने पर जताई आपत्ति

मोहित डिमरी ने कहा अगर सरकार को नाम बदलने ही थे तो स्थानीय विभूतियों के नाम पर रखना चाहिए था. जिनसे उत्तराखंड की भावनाएं जुड़ी हैं. डिमरी ने कहा कि देहरादून के मियांवाला का नाम उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्र टिहरी, पौड़ी से लेकर देहरादून घाटी में बसे मियां जाति के राजपूतों के नाम पर रखा गया था. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और भाजपा नेताओं को न तो इतिहास का ज्ञान है और न ही वे पहाड़ के समाज के बारे में जानते हैं. इसीलिए वे जाने-अनजाने उत्तराखंड के समाज का अपमान करते हैं. डिमरी ने कहा कि उत्तराखंड के मियां राजपूतों के सम्मान में सरकार द्वारा रखे गए देहरादून के मियांवाला का नाम बदलना उत्तराखंडी समाज का अपमान है

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News100Live Desk
टीम न्यूज़ 100 लाइव